राजस्थान में बागी तेवर अपनाने वाले सचिन पायलट की राहुल और प्रियंका के साथ मुलाकात की पटकथा वरिष्ठ नेताओं ने नहीं बल्कि पार्टी की यंग ब्रिगेड ने लिखी। यंग ब्रिगेड के प्रयासों को केसी वेणुगोपाल और पी. चिदम्बरम जैसे वरिष्ठ नेताओं का भी समर्थन मिला। युवा नेताओं और टीम राहुल ने बहुत गोपनीय तरीके से पायलट से संपर्क बनाए रखा। इसके बाद ही राहुल और पायलट की मुलाकात संभव हो पाई।

युवा नेताओं ने जताई थी पायलट के साथ सहानुभूति
राजस्थान में पायलट और गहलोत के बीच चल रही तनातनी को लेकर युवा नेता खुश नहीं थे। पार्टी के युवा नेताओं ने पायलट के लिए हमदर्दी जताने वाले ट्वीट किए थे। इनका कहना था कि पार्टी से एक के बाद एक कर युवा नेताओं के जाने से लोगों में गलत संदेश जा रहा है। पार्टी की यंग ब्रिगेड ने इस बात को राहुल के सामने जोरदार तरीके से रखा।

इन युवा नेताओं में राहुल के करीबी दीपेंद्र हुड्डा, भंवर जितेन्द्र सिंह, मिलिंद देवड़ा और जितिन प्रसाद की मुख्य भूमिका रही। पार्टी के कद्दावर नेता पी. चिदम्बरम ने भी यंग ब्रिगेड की बातों का समर्थन किया। राहुल गांधी से हरी झंडी मिलने के बाद भंवर जितेन्द्र सिंह और हुड्डा ने पायलट से बात की। मुलाकात के बाद सुलह का क्या फार्मूला निकाला जाए, इसमें केसी वेणुगोपाल और अहमद पटेल की भूमिका बताई जा रही है।

गहलोत के लगातार हमलों के बाद भी इसलिए चुप रहे पायलट
एक बार भूमिका तैयार होने के बाद बातचीत के कई दौर चले। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, गहलोत की बयानबाजी से पायलट बहुत ज्यादा आहत थे। लेकिन, फिर भी पायलट का गहलोत के खिलाफ कोई बयान नहीं आया। कहा जा रहा है कि युवा ब्रिगेड की सलाह पर ही पायलट शांत रहे ताकि उनके दरवाजे पार्टी के लिए खुले रहें। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी पायलट से चुप रहने को कहा था, जिससे कांग्रेस आलाकमान के सामने उनको लेकर असहज स्थिति न बने।

पायलट से कहा गया- इंतजार करिए, सब ठीक हो जाएगा
राहुल से मुलाकात के दौरान पायलट ने पार्टी में अपने भविष्य को लेकर सवाल भी उठाए, लेकिन उनसे कहा गया कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। कहा जा रहा है कि राहुल ने भी पायलट से फिलहाल गहलोत सरकार बचाने और इंतजार करने को कहा है। सचिन से कहा गया है कि थोड़े समय बाद सरकार या संगठन में उनकी वापसी का रास्ता तलाशा जाएगा।