जयपुर।

देश के पूर्व गृह मंत्री और दिग्गज राजनेता रहे बूटा सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के करीबी रहे बूटा सिंह ने शनिवार सुबह अंतिम सांस ली। बूटा सिंह का राजस्थान से पुराना नाता रहा है। स्वर्गीय बूटा सिंह का राजस्थान से जुड़ा एक किस्सा आज भी सियासत के जानकारों के जेहन में ताजा है क्योंकि ये जुड़ा है दिग्गज राजनेता रहे भैरों सिंह शेखावत, कैलाश मेघवाल और स्वयं बूटा सिंह से।


बूटा सिंह जालौर से सांसद भी रह चुके हैं लेकिन जब वे अपने राजनीतिक जीवन के परवान पर थे तब राजस्थान की धरती पर ही उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जो देश भर में सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। हम बात कर रहे हैं साल 1989 लोकसभा चुनाव की जिसमें तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह को राजस्थान की राजनीति के माने जाने वाले दिग्गज भैरों सिंह शेखावत के खास सिपहसालार कैलाश मेघवाल ने शिकस्त दी। हालांकि यह बात और कि मेघवाल तब खुद बूटा सिंह जैसे दिग्गज राजनेता के सामने यह चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे।


पूर्व पीएम राजीव गांधी ने ही बूटा सिंह के लिए राजस्थान की जालौर लोकसभा जो काफी सुरक्षित मानी जाती है, उसे चुना और वहां से बूटा सिंह को चुनाव मैदान में उतराया था। हालांकि तब बूटा सिंह के सामने चुनाव लड़ाने के लिए भैरों सिंह शेखावत को कोई नाम नहीं मिल रहा था लेकिन तब जयपुर में शेखावत ने मेघवाल को बुलाया और जालौर सीट से चुनाव लड़ने को कहा। सियासी जानकार और वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि तब मेघवाल ने बाबोसा यानी शेखावत को कह दिया कि बाबोसा में जालोर नहीं जाऊंगा..तब शेखावत भाजपा मुख्यालय के भीतर अपने कमरे में गए और दराज में रखें एक लिफाफे को निकालकर मेघवाल के हाथ में थमा दिया और यह भी कहा कि अब लोकसभा चुनाव तक वो जयपुर में नजर ना आए। यह फरमान था मेघवाल को बूटा सिंह के सामने चुनाव लड़ने का.. जिसेे मानना मेघवाल का दायित्व ओर मजबूरी दोनों थी। खैर मेघवाल जालौर पहुंचे और चुनाव में जुटे लेकिन बाबोसा ने कुछ ही दिनों बाद वहां पहुंचकर चुनावी सभा को संबोधित किया। तब मंच से शेखावत ने बफोर्स मामले का जिक्र किया और इस मामले की गूंज के साथ ही सभा में कई नारों ने जन्म भी लिया। कुछ दिनों बाद जब चुनाव का परिणाम सामने आया तो वह चौंकाने वाला था.. क्योंकि चुनाव नहीं लड़ने की मंशा जताने वाले कैलाश मेघवाल ने चुनाव जीत चुके थे और तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह इस चुनाव में हार का मुंह देख चुके थे। इन चुनाव के बाद कैलाश मेघवाल ने राजनीति में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और यही किस्सा आज तक राजस्थान के सियासी जानकारों के जेहन में ताजा है।

हालांकि आज बूटा सिंह हमारे बीच नहीं रहे। देश ने एक दिक्कत राजनेता को खो दिया, जिसका गम राजनीति से जुड़े हर दल के नेता को है और वे अपने तरीकों से सोशल मीडिया के माध्यम से स्वर्गीय बूटा सिंह को श्रद्धांजलि भी दे रहे हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई राजनेताओं ने ट्वीट के जरिए बूटा सिंह के निधन पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है।