रूस के करीबी देश बेलारूस में छठी बार चुनाव हो रहे हैं। बेलारूस 25 अगस्त, 1991 को सोवियत संघ से अलग होकर आजाद देश बना था। इसके बाद संविधान बना और जून 1994 को पहला राष्ट्रपति चुनाव हुआ। राष्ट्रपति बने अलेक्जेंडर लुकाशेंको। 1994 से लेकर अब तक पांच बार चुनाव हो चुके हैं। राष्ट्रपति अभी भी लुकाशेंको ही हैं। लुकाशेंको को एक डिक्टेटर यानी तानाशाह के तौर पर देखा जाता है। उन पर हर बार चुनावों में गड़बड़ी कराने के आरोप लगे हैं। 26 सालों में पहली बार लुकाशेंको को बड़ी चुनौती मिल रही है। इस बार उनके सामने 37 साल की स्वेतलाना हैं। स्वेतलाना के पति को लुकाशेंको प्रशासन ने जेल में डाल दिया था।

पोलिंग स्टेशनों पर भीड़ दिखी

रविवार को वोटिंग शुरू होते ही राजधानी मिंस्क के पोलिंग स्टेशनों में भीड़ देखी गई। इस दौरान कई वोटर सफेद ब्रेसलेट पहने नजर आए। स्वेतलाना ने अपने वोटरों से चुनाव के दिन सफेद ब्रेसलेट पहनने को कहा था। शुरुआती मतदान के दौरान ही रिकॉर्ड 41.7% वोटिंग हो चुकी थी।

क्या इस बार लुकाशेंको को हार मिलेगी?

शायद नहीं। लुकाशेंको की फिर से जीत तय मानी जा रही है। लेकिन, इस बार उन्हें टक्कर मिल सकती है। लोगों की भावनाएं विपक्षी उम्मीदवार स्वेतलाना के साथ हैं। लोग लुकाशेंको की तानाशाही और कोरोना महामारी पर लापरवाह रवैये से नाराज है। कोरोनावायरस पर वह कहते रहे हैं कि वोडका पीने और ट्रैक्टर चलाने से कोरोना ठीक हो जाता है।

कौन हैं विपक्षी उम्मीदवार स्वेतलाना?

स्वेतलाना पहले टीचर थीं। उनके पति सरहेई लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता हैं। उन्हें लुकाशेंको प्रशासन ने जेल में डाल दिया। इसके बाद से स्वेतलाना खुद मोर्चा संभाल रही हैं। हाल ही में उनके कैंपेन मैनेजर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

कौन-कौन मैदान में?

लुकाशेंकों और स्वेतलाना के अलावा चुनाव में तीन और उम्मीदवार हैं। इसमें 2016 में संसदीय चुनावों में एमपी बने एना कनोपत्सेकाया, ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी’ के नेता सर्जेई चेर्चेन और ‘टेल द ट्रुथ मूवमेंट’ के सह अध्यक्ष एंड्रेई द्मित्रियेव शामिल हैं। इसके अलावा दो और लोग चुनाव में खड़े थे, लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने अपना सपोर्ट स्वेतलाना को दे दिया है।

लुकाशेंको इतने सालों से सत्ता में कैसे?

रूस और यूरोपियन यूनियन के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। लुकाशेंको इसी का फायदा उठाते रहे हैं। कभी वह ईयू के साथ मिल जाते हैं तो कभी रूस के साथ। लुकाशेंको की चुनावी धांधली पर जब ईयू ने प्रतिबंध लगाए तो वह रूस के पाले में आ गए। इन दिनों वह रूस से खफा चल रहे हैं। उन्होंने रूस पर चुनाव में दखलंदाजी का भी आरोप लगाया है।

चुनाव में रूसी दखलंदाजी

बीबीसी की खबर के मुताबिक बेलारूस ने 33 रूसी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर विपक्ष के साथ मिलकर देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया गया है। रूस ने इन आरोपों को खारिज कर बताया कि ये नागरिक सब बेलारूस से होते हुए तुर्की जा रहे थे।